दिल के कोने में दफ्न कहीं,
कुछ अनकही सी बातें है।
समझ नही पाती जिसको ,
कौन सी ये ज़ज्बाते हैं।।
पता नहीं कैसा दस्तूर यहाँ,
जो कल पास थे आज दूर है।
रिश्ते कहने को बहुत यहाँ,
पर खुद में सब मसरूफ है।।
खुशी के पल सबकों पता,
गम खुद ही झेल जाती हूँ।
गम भी बता दू किसी को,
ऐसा नहीं कोई पाती हूँ।।
किस पर करूँ यहा भरोसा,
सबके दो-दो चेहरे हैं।
सबके दिल में यहाँ दबे,
राज बहुत ही गहरे हैं।।
मतलब की इस दुनियाँ में,
मतलब के सब यार है।
वक्त चल रहा गर अच्छा,
सब जुड़ने को तैयार हैं।।
बुरा वक्त आने पर,
अपनों ने मुँह फेरा है।
बुरा वक्त ही अपना साथी,
क्योंकि असली उसका चेहरा है।।
बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है
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