कौन हूँ मैं?क्या मेरा अस्तित्व है,
क्या मेरे सपने?क्या मेरा भविष्य हैं!
क्यूँ कभी खुद को असहाय सा पाती हूँ।
दूसरो की पसंद से क्यों खुद को सिमटाती हूँ।।
कितना हँसना?,कितना बोलना?,
कहाँ है जाना?,क्या है करना?,
क्यों दूसरे हमें सिखाते है।
अपनी मर्जी को हम पर
क्यों थोप अधिकार जताते है।।
संसार की खूबसूरती के लिए,
ईश्वर ने रच दिया लड़की।
लेकिन लोभी इंसानो ने बना दिया,
उसे सबसे बड़ी समस्या जग की।।
हे ईश्वर!इस जग में तू कर ले,
अब से भी सुधार।
अपनी इस सुंदर कृति का
बनवा लिया बहुत मजाक।।
हो सके तो अब से भी,
अपनी सृष्टि में परिवर्तन कर।
यहाँ बसे इंसानो की जगह,
तू सिर्फ इंसानियत भर।।
नहीं तो बना दे हमारे लिए
एक अलग दुनियॉ।
जहाँ सब खुश हो देखकर,
जहाँ सब खुश हो देखकर,
औरों की खुशिया।।
जहाँ पर स्वार्थ ,लालच,
ईर्ष्या ,द्वेष का न हो भाव।
जहाँ पर हर दुख का रहे,
हर युग में अभाव।।
बना दे हमारे लिए,
ऐसी दुनियॉ कोई।
जहाँ फिर से जिये,
जहाँ फिर से जिये,
हम अपनी जिंदगी खोई।।
बहुत सुंदर रचना
ReplyDeletethank u Anuradha mam
ReplyDeleteहिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं संजय भास्कर हार्दिक स्वागत करता हूँ...!
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